निजी स्कूलों की मनमानी रोकने के लिए मौजूदा सत्र में विधेयक लाए सरकार

छात्र अभिभावक मंच हिमाचल प्रदेश ने निजी स्कूलों में भारी फीसों,मनमानी लूट,फीस वृद्धि व गैर कानूनी फीस वसूली पर रोक लगाने के लिए प्रदेश सरकार से वर्तमान मानसून सत्र में कानून बनाने की मांग की है। मंच ने प्रदेश सरकार को चेताया है कि अगर वर्तमान विधानसभा सत्र में कानून पर सरकार ने सकारात्मक रुख न अपनाया तो निजी स्कूलों से प्रदेश सरकार व शिक्षा विभाग की मिलीभगत के खिलाफ छात्र अभिभावक मंच मोर्चा खोलेगा।

मंच के संयोजक विजेंद्र मेहरा व सदस्य विवेक कश्यप ने मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर,नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री,माकपा नेता राकेश सिंघा व कांग्रेस नेता सुखविंदर सिंह सुक्खू से अपील की है कि वे वर्तमान विधानसभा सत्र में निजी स्कूलों पर नकेल लगाने के लिए कानून को अमलीजामा पहनाने की पहलकदमी करें ताकि प्रदेश के सात लाख छात्रों व दस लाख अभिभावकों को न्याय मिल सके। उन्होंने कहा है कि प्रदेश सरकार की नाकामी व उसकी निजी स्कूलों से मिलीभगत के कारण ही निजी स्कूल लगातार मनमानी कर रहे हैं। कोरोना काल में भी निजी स्कूल टयूशन फीस के अलावा एनुअल चार्जेज़,कम्प्यूटर फीस,स्मार्ट क्लास रूम,मिसलेनियस,केयरज़,स्पोर्ट्स,मेंटेनेंस,इंफ्रास्ट्रक्चर,बिल्डिंग फंड,ट्रांसपोर्ट व अन्य सभी प्रकार के फंड व चार्जेज़ वसूलते रहे हैं। निजी स्कूलों ने बड़ी चतुराई से वर्ष 2022 में कुल फीस के अस्सी प्रतिशत से ज़्यादा हिस्से को टयूशन फीस में बदल कर लूट को बदस्तूर जारी रखा है। उन्होंने प्रदेश सरकार पर निजी स्कूलों से मिलीभगत का आरोप लगाया है। कानून का प्रारूप तैयार करने में ही इस सरकार ने तीन वर्ष का समय लगा दिया। अब जबकि एक साल पहले अभिभावकों ने कानून को लेकर दर्जनों सुझाव दिए हैं तब भी जान बूझकर यह सरकार कानून बनाने में आनाकानी कर रही है। पिछले बजट सत्र में कानून हर हाल में बनना चाहिए था परन्तु सरकार की संवेदनहीनता के कारण कानून अभी तक भी नहीं बन पाया है। सरकार की नाकामी के कारण ही बच्चों की फीस में पिछले दो वर्षों में पन्द्रह से पचास प्रतिशत तक की बढ़ोतरी की गई है व इस बढ़ोतरी पर सरकार मौन है। उन्होंने कहा है कि फीस वसूली के मामले पर वर्ष 2014 के मानव संसाधन विकास मंत्रालय व 5 दिसम्बर 2019 के शिक्षा विभाग के दिशानिर्देशों का निजी स्कूल खुला उल्लंघन कर रहे हैं व इसको तय करने में अभिभावकों की आम सभा की भूमिका को दरकिनार कर रहे हैं। निजी स्कूल अभी भी एनुअल चार्जेज़ की वसूली करके एडमिशन फीस को पिछले दरवाजे से वसूल रहे हैं व उच्च न्यायालय के वर्ष 2016 के निर्णय की अवहेलना कर रहे हैं। जिसमें उच्च न्यायालय ने सभी तरह के चार्जेज़ की वसूली पर रोक लगाई थी। उन्होंने प्रदेश सरकार से मांग की है कि वह निजी स्कूलों में फीस,पाठयक्रम व प्रवेश प्रक्रिया को संचालित करने के लिए वर्तमान मानसून सत्र में कानून बनाए व रेगुलेटरी कमीशन का गठन करे।

Leave a Reply

Your email address will not be published.