आदमी ने बीते साल से कम तय किए सेब के दाम, किसानों ने नकारे

अदानी एग्री फ्रेश द्वारा अबकी बार सेब के कम दाम तय किए है। इसको लेकर किसानों ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है।
संयुक्त किसान मंच ने कहा है कि अदानी एग्री फ्रेश द्वारा जो सेब खरीद का दाम किये है,उसे वह पूर्ण रूप से नकारता है।
मंच का कहना है कि यह गत वर्ष की तुलना में काफी कम है जबकि खाद, कीटनाशक, फफूंदीनाशक, कार्टन, ट्रे व अन्य लागत वस्तुओं की कीमतों में 25 से 80 प्रतिशत तक की वृद्धि की गई ।
संयुक्त किसान मंच के संयोजक हरीश चौहान और सह संयोजक संजय चौहान ने कहा है कि गत वर्ष कंपनियों के द्वारा जिस सेब के दाम 85 रुपये, 73 रुपये, 63 रुपये व 53 रुपये प्रति किलो के हिसाब से तय किये थे, वह इस वर्ष अदानी द्वारा 76 रुपये, 68 रुपये, 60 रुपये व 52 रुपये प्रति किलो तय किये गए हैं। इससे स्पष्ट हो जाता है कि सरकार अदानी व अन्य कंपनियों के दबाव में काम कर रही है और इन कंपनियों के द्वारा बागवानों के शोषण व लूट की खुली छूट दे रही है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि सरकार तुरन्त अदानी व अन्य कंपनियों द्वारा घोषित दाम को निरस्त करे तथा कंपनियों के द्वारा बागवानों के शोषण व लूट पर तुरन्त रोक लगाए। अपने वायदे के अनुसार सरकार इन कंपनियों के द्वारा सेब के दाम तय करने के लिए तुरन्त कमेटी का गठन करें, जिसमे बागवानों के प्रतिनिधि आवश्य सम्मिलित हो।
किसान नेताओं कहा है कि सरकार की इस वायदा खिलाफी व किसान बागवान विरोधी रवय्ये के विरुद्ध संयुक्त किसान मंच अपना आंदोलन तेज करेगा और 17 अगस्त को जेल भरो आंदोलन आरम्भ करेगा। ये आंदोलन तब तक जारी रहेगा, जब तक सरकार सभी मांगों को मानकर इन्हें जमीनी स्तर पर लागू कर किसानों व बागवानों को राहत प्रदान नही करती।
संजय चौहान ने कहा है कि मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में संयुक्त किसान मंच के प्रतिनिधियों के साथ 28 जुलाई को जो बैठक की गई थी, उसमें मुख्यमंत्री ने अन्य मांगों के साथ आश्वासन दिया था कि अदानी व अन्य कंपनियों द्वारा सेब के दाम तय करने के लिए एक कमेटी का गठन किया जाएगा, उसमे बागवान भी शामिल किये जायेंगे। उसके पश्चात बागवानों द्वारा 5 अगस्त को सचिवालय घेराव किया गया तथा इसके बाद मुख्यसचिव के साथ जो बैठक हुई, उसमें मुख्यसचिव ने स्वयं कहा कि बागवानी विश्विद्यालय नौणी की अध्यक्षता में कंपनियों द्वारा सेब के दाम तय करने के लिए एक कमेटी का गठन किया गया है, जिसमे बागवानों के प्रतिनिधि भी शामिल हैं। परन्तु सरकार ने अभी तक न तो कमेटी का गठन किया और अब अदानी व अन्य कंपनियों ने सेब के दाम तय कर दिए हैं। इससे सरकार के झूठ का पर्दाफाश हुआ है व इनका कंपनियों के साठगांठ सामने आई है।
उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा अभी तक संयुक्त किसान मंच द्वारा तय किए गए 20 सूत्रीय मांगपत्र पर कोई भी ठोस कार्यवाही नहीं की है और मात्र झूठी घोषणाएं कर भ्रम फैला रही है। सरकार निरन्तर किसान विरोधी नीतियों को लागू कर कृषि संकट को बढ़ा रही है। जिससे प्रदेश में आज कृषि व बागवानी से आजीविका कमाने वाले लाखों परिवारों का रोजी रोटी का संकट खड़ा हो गया है। संयुक्त किसान मंच ने सरकार की इन किसान व बागवान विरोधी नीतियों को पलटने के सभी किसानों व बागवानों से आग्रह किया है कि वे संगठित होकर आंदोलन में भागीदारी कर अपने संघर्ष को तेज करें।

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