May 22, 2024

तीन दशक बाद बागवान फिर सड़कों पर, सचिवालय घेरा

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हिमाचल के बागवान तीन दशक बाद आज फिर से सडक़ों पर उतरे हैं। बगवानों ने आज सरकार के खिलाफ आक्रोश रैली निकालकर बड़े आंदोलन का आगाज किया । सरकार के खिलाफ उग्र हुए हजारों बागवानों ने नवबहार से सचिवालय तक आक्रोश रैली निकाली और फिर सचिवालय का घेराव किया । किसानों बागवानों ने सरकार को चेताया कि वह उनको हलके में ना ले। अगर अगर सरकार ने बउनकी मांगे नहीं मानी तो हिमाचल में भी दिल्ली की तर्ज पर आंदोलन होगा । हालांकि पुलिस ने बागवानों को रोकने के लिए सचिवालय के बाहर तीन बैरिकेडिंग कर सर्कुलर रोड को बंद कर रखा था, बावजूद इसके बागवानों के आगे पुलिस बल कम पड़ गया। आंदोलनरत बागवानों को आगे बढऩे से रोकने पर पुलिस और बागवानों के बीच हल्की झड़प भी हुई । गुस्साए बागवान बागवानी मंत्री मुर्दाबाद के नारे लगाते हुए जमकर प्रर्दधन कर रहे थे । बारिश के बावजूद भारी संख्या में बागवान आक्रोश रैली में पहुंचे। सचिवालय के बाहर धरना स्थल पर भी बारिश में छाता लिए डटे रहे। इस प्रदर्शन में महिलाएं भी बड़ी संख्या में शामिल हुई।
किसान.बागवान फलों की पैकेजिंग पर जीएसटी खत्म करने, कश्मीर की तर्ज पर एमआईएस के तहत सेब खरीद करने और सेब पर आयात शुल्क 100 फीसदी करने की मांग कर रहे हैं। बागवान संगठन सरकार की ओर दी गई 6 फीसदी जीएसटी छूट की जटिल प्रक्रिया को सरल बनाने की भी मांग कर रहे हैं।

मंडियों में एपीएमसी कानून सख्ती से लागू करने, बैरियरों पर मार्केट फीस वसूली बंद करने, खाद, बीज, कीटनाशकों पर सब्सिडी बहाल करने, कृषि बागवानी
सहयोगी उपकरणों पर सब्सिडी जारी करने, प्राकृतिक आपदाओं का मुआवजा जारी करनेए ऋण माफ करनेए बागवानी बोर्ड का गठन करनेए सभी फसलों के लिए एमएसपी तय करनेए निजी कंपनियों के सेब खरीद रेट तय करने को कमेटी बनाने, सहकारी समिति को सीए स्टोर बनाने के लिए 90 फीसदी अनुदान देने, भूमि अधिग्रहण कानून 2013 को लागू करने और मालभाड़े की बढ़ी दरों को वापस लेने की मांग की जा रही है।बागवानों की यह रैली संयुक्त किसान मंच के बैनर तले आयोजित की गई है। भाजपा को छोडक़र सभी दलों ने इस रैली के समर्थन का ऐलान
किया था। बागवानों में महंगे कार्टन और कृषि पर लागत बढऩे से जोरदार रोष है। बागवानों का कहना था कि मोदी सरकार ने कृषि को कमाई का जरिया बना दिया है। कुछ साल पहले तक कृषि इनपुट पर कोई टैक्स नहीं लगता था।
मोदी सरकार ने पहले इसे जीएसटी के दायरे में लाया। अब साल दर साल इसमें बढ़ोतरी की जा रही है। यही वजह है कि 2019 में 40 से 52 रुपए में मिलने वाला कार्टन इस साल 65 से 85 रुपए पहुंच गया है। इसी तरह दो से अढ़ाई रुपए में मिलने वाली ट्रे इस बार चार से पांच रुपए की हो गई है।

लाखों परिवारों की रोजी रोटी पर संकट: सोहन ठाकुर

सेब उत्पादक संघ के अध्यक्ष सोहन ठाकुर ने कहा कि यदि सेब उद्योग को बर्बाद होने से नहीं बचाया गया तो अढ़ाई लाख से ज्यादा परिवारों की रोजी रोटी पर संकट आ जाएगा। उन्होंने कहा कि बागवान कभी किसी से कुछ नहीं मांगता बल्कि दर्जनों लोगों को अपने बगीचों में रोजगार देता है। फिर भी केंद्र व राज्य सरकार इस उद्योग को बर्बाद करने पर तुली हुई है।

मुख्यमंत्री को सौंप रखा है 20 सूत्रीय मांग पत्र

बागवानों ने मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर को 20 सूत्रीय मांग पत्र सौंप रखा है। इसमें से चार से पांच मांगे मान ली गई है लेकिन ज्यादातर मांगों पर अभी सहमति नहीं बन पाई है। इन्हीं मांग को लेकर बागवान पहले भी ठियोग,
रोहड़ूए नारकंडा, आनी, कोटखाई, चौपाल इत्यादि सेब बहुल क्षेत्रों में कई बार प्रदर्शन कर चुके हैं।

निर्णायक लड़ाई लड़ेंगे बागवान: संजय चौहान

संयुक्त किसान मंच के सह संयोजक संजय चौहान ने कहा कि बागवान अपनी 5000 करोड़ की एपल इंडस्ट्री को बचाने के लिए बागवान लंबी लड़ाई लडऩे को तैयार है। अब निर्णय सरकार को करना है कि बागवानों की मांगे कितनी जल्दी पूरी करती है। उन्होंने बताया कि इससे पहले बागवानों ने 1987 और 1990 में ऐसे बड़े आंदोलन लड़े हैं। इस बार फिर से ऐसी ही निर्णायक लड़ाई लड़ी जाएगी।

बागवान बताएंगे सरकार को अपनी ताकत: राकेश सिंघा

ठियोग के विधायक राकेश सिंघा ने कहा कि सरकार पर बागवानों की अनदेखी भारी पडऩे वाली है। आगामी विधानसभा चुनाव में सरकार को इसका जवाब मिल
जाएगा। उन्होंने बताया कि बागवान सेब का तुड़ान करने के बजाय खेत.खलियान छोडक़र सडक़ों पर उतर आया है। इसलिए सरकार को अब बागवानों के सामने झुकना पड़ेगा।

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