एसजेवीएन ने राजस्थान में 5500 करोड़ रुपए के ईपीसी अनुबंध पर 1000 मेगावाट की सौर परियोजना अवार्ड की

एसजेवीएन ने मैसर्स टाटा पावर सोलर सिस्टम्स लिमिटेड को बीकानेर, राजस्थान में 1000 मेगावाट सौर परियोजना के इंजीनियरिंग, प्रापण एवं निर्माण (ईपीसी) के लिए एलओए (अवार्ड पत्र) जारी किया।

एसजेवीएन के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक नन्‍द लाल शर्मा ने बताया कि आज तक प्रदान किया गया भारत का सबसे बड़ा सौर ईपीसी अनुबंध है। परियोजना के निर्माण और विकास की समग्र लागत 5491.89 करोड़ रुपए है। यह परियोजना पहले वर्ष में 2454.55 मि.यू. विद्युत उत्‍पादन करेगी और 25 वर्षों की अवधि में लगभग 56838.32 मि.यू. का विद्युत उत्पादन करेगी। इस परियोजना की कमीशनिंग से 25 वर्ष में लगभग 27,85,077 टन कार्बन उत्सर्जन में कमी आने की उम्मीद है। यह परियोजना मई 2024 तक कमीशन होगी।

नंद लाल शर्मा ने कहा कि, “यह परियोजना भारत सरकार के 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता के लक्ष्य को प्राप्त करने और वर्ष 2030 तक कुल अनुमानित कार्बन उत्सर्जन में एक बिलियन टन की कमी करने की हमारी प्रतिबद्धता को और दृढ़ता प्रदान करती है।  हाल ही में अर्जित नई सौर परियोजनाएं एसजेवीएन के वर्ष 2023 तक 5000 मेगावाट, 2030 तक 25000 मेगावाट और वर्ष 2040 तक 50000 मेगावाट के साझा विजन को प्राप्त करने का मार्ग प्रशस्त कर रही है।”

नन्‍द लाल शर्मा ने आगे बताया कि इस ईपीसी अनुबंध के दायरे में एसजेवीएन को प्रारंभ से अंत तक कमीशन किए गए सोलर संयंत्र की डिलीवरी शामिल है, जिसमें एकमुश्त प्रापण के आधार पर भूमि की व्यवस्था, आईएसटीएस सब स्टेशन तक विद्युत की निकास प्रणाली और तीन वर्षों के लिए सौर पीवी संयंत्र का प्रचालन और रखरखाव शामिल है। 

1000 मेगावाट की सौर ऊर्जा परियोजना को भारत सरकार की सीपीएसई योजना के तहत प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया के माध्यम से एसजेवीएन द्वारा हासिल किया गया था।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और केंद्रीय ऊर्जा मंत्री आर. के. सिंह के मार्गदर्शन में, एसजेवीएन अपने पोर्टफोलियो में महत्वपूर्ण क्षमताएं जोड़ रहा है। वर्तमान में, एसजेवीएन के पास लगभग 31,000 मेगावाट का पोर्टफोलियो है। हाइड्रो, थर्मल, विंड और सोलर के माध्यम से विद्युत उत्‍पादन करने के अलावा, एसजेवीएन ने पावर ट्रांसमिशन और पावर ट्रेडिंग में भी विविधीकरण और प्रवेश किया है।

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