एबीवीपी की तीन दिवसीय राष्ट्रीय कार्यकारी परिषद् की बैठक शिमला में आरंभ

Last updated on June 2nd, 2022 at 07:49 pm

एबीवीपी की तीन दिवसीय राष्ट्रीय कार्यकारी परिषद् की बैठक शिमला में सरस्वती विद्या मदिर, हिमरशमि परिसर, विकास नगर में प्रारम्भ हुई। देश के सभी हिस्सों से कुल 469 प्रतिनिधि इस बैठक में हिस्सा ले रहे है। बैठक का शुभारम्भ अभाविप के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रो छग्गन भाई पटेल, राष्ट्रीय महामंत्री निधि त्रिपाठी एवं राष्ट्रीय संगठन मंत्री आशीष चौहान द्वारा दीप प्रज्वलन कर किया गया। एबीवीपी के 75 वर्ष, स्वावलंबी भारत, राष्ट्रीय शिक्षा नीति का क्रियान्वयन, राज्य सरकारों का विश्वविद्यालयों में बढ़ता हस्तक्षेप, एवं पेपर लीक जैसे मामलों पर कार्यकारी परिषद् विस्तृत चर्चा करेगी। देश भर के शैक्षिक परिसरों में आ रही समस्याओं पर भी बैठक में चर्चा होगी जिनके निवारण हेतु योजना भी बनाई जाएगी। कार्यकारी परिषद् में 4 प्रस्ताव भी प्रतिनिधियों के समक्ष चर्चा के लिए रखे जायेंगे, जिनमें सुझावों को शामिल कर कार्यकारी परिषद् द्वारा पारित किया जायेगा।



एबीवीपी की राष्ट्रीय महामंत्री निधि त्रिपाठी ने कहा, “असम, काशी विश्वविद्यालय, केरल में छात्रसंघ चुनाव में विद्यार्थी परिषद की प्रचंड जीत, राष्ट्रीयता के भाव की बढ़ती प्रासंगिकता को दर्शाती है। पेपर लीक की घटनाओ को लेकर विद्यार्थी परिषद संघर्ष की ओर अग्रसर है। विश्वविद्यालयों में राजनीतिक हस्तक्षेप शिक्षा जगत के लिए घातक है। हिम तंरगोत्स सोलन, मंडी जिला में मिशन साहसी आदि रचनात्मक कार्यक्रम हिमाचल में आयोजित किए हैं। उन्होंने कहा कि अभाविप के इतिहास पर आयी पुस्तक की प्री बुकिंग ने रिकॉर्ड तोड़ते हुए, 1.27 हजार ध्येय यात्रा पुस्तक का अंतरिम पंजीकरण करवाया है। लावण्या के न्याय की लड़ाई लड़ते हुए अभाविप देश के अल्पसंख्य शैक्षिक सस्थानों में ‘एंटी- कन्वर्शन हेल्पलाइन’ लागू करने हेतु प्रयासरत रहेगी। यह कार्यकारी परिषद् देश भर के शैक्षिक विषयों पर गहन चर्चा करेग एवं समाधानों को खोजने का काम करेगी। प्रत्येक विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण कर राष्ट्र पुनः निर्माण के कार्य में योगदान दे।”

शिमला में होने रही राष्ट्रीय कार्यकारी परिषद की बैठक ऐतिहासिक: प्रो छग्गन भाई पटेल

राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रो छग्गन भाई पटेल ने कहा कि, “शिमला में होने जा रही यह राष्ट्रीय कार्यकारी परिषद बैठक ऐतिहासिक है। यह वो स्थान है जहाँ शिमला करार हुआ था। हिमाचल प्रदेश में अभाविप का कार्य मजबूत करने में शिमला की अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में जो हालत है वो लोकतंत्र के साथ धोखा है। शिक्षा क्षेत्र में राजनैतिक दबाव न हो ऐसी एक शैक्षिक परिवार की कल्पना अभाविप करती है। प्रवेश – परिक्षा- परिणाम के सुधार के लिए अभाविप शुरू से ही संघर्ष कर रही है। अनेक मेडिकल एवं महाविद्यालयों में छात्रों के आत्महत्या के मामले सामने आ रहे हैं और इसलिए शिक्षण संस्थानों में आनंदमयी- सार्थक जीवन की ओर प्रयास होना चाहिए जिसको लेकर अभाविप भी देश भर में प्रयास कर रही है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लेकर अभाविप ने बहुत सुझाव दिये है और अब उसके क्रियान्वयन हेतु अभाविप प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि मातृभाषा में शिक्षा के माध्यम से छात्रों में आत्मविश्वास आता है, इसीलिए यह राष्ट्रीय शिक्षा नीति आवश्यक है।”

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